उन बालकों की नजर राजू के ऊपर गई , जिसके पास गेंद थी।
आप अगर और कहानियां भी डाल सके तो अच्छा रहेगा
चूहे उछल कर भाग गए, किंतु वह डंडा इतना तेज चलाया गया था कि टॉफी रखने वाली शीशे की जार टूट गई।
एक दिन श्याम खेल-खेल में लकड़ी से कुछ बर्तन बना रहा था, इस पर मदन और उनकी पत्नी यानी कि श्याम के मम्मी-पापा ने डांट लगाई और कारण पूछा कि यह क्या कर रहे हो?
एक लाठी निकाली और कालिया की मरम्मत कर दी।
आज का समय बदल चुका है, जहाँ हमने अपने बचपन में इन कहानियों को अपने दादा-दादी और नाना-नानी से सुनी थी, वो कहानियां आज इंटरनेट पर check here मात्र कुछ ही समय में उपलब्ध हो जाती है।
घसीटते -घसीटते वह अपने घर पहुंच गई। उसके मम्मी – पापा और भाई-बहनों ने देखा तो वह भी दौड़कर आ गए। टॉफी उठाकर अपने घर के अंदर ले गए।
गांव के लोगों में उसका डर था। गांव में रामकृष्ण परमहंस आए हुए थे।
आवेग और स्वयं की गलती का फल खुद को तो भोगना पड़ता ही है , साथ में दूसरे लोग भी उसकी सजा भुगतते हैं।
हाथ पैर काबू से बाहर हो गए थे, अर्थात ना चाहते हुए भी हाथ पैर हिलना, धुंधला दिखना आदि।
न जाने आज कैसा दिन था कि आज उसे कोई सुखी लकड़ी या सुखा पेड़ मिल ही नहीं रहा था। वह थक हार कर एक जगह बैठ गया वह आज बेहद दुखी था कि आज उसे घर ले जाने के लिए अन्य पानी का प्रबंध नहीं हो सका। वह सोचते सोचते बेसुध हो गया और वहीं लेट गया।
इतिहास में मीराबाई का नाम बड़े आदर और सत्कार से लिया जाता है।
मां, उन बच्चों को देख रहा हूं। वो सबकी गाड़ी के पास जाकर हाथ फैलाकर क्...
सिंह राज ने देखते ही देखते सभी सियारों को खदेड़ दिया। जिसके कारण उसके मित्र सुरसिंह की जान बच सकी